==चैनल प्रमुख हलधर रात्रे 7974343059==


आत्मनिर्भर भारत की नई उड़ान भारतीय नौसेना में एक साथ शामिल होंगे तीन स्वदेशी युद्धपोत
कोलकाता
भारतीय नौसेना आज अपनी समुद्री ताकत में एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व अध्याय जोड़ने जा रही है। कोलकाता में आयोजित एक विशेष समारोह में तीन स्वदेशी युद्धपोतों—INS दुनागिरी, INS संशोधक, और INS अग्रय—को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल (कमीशन) किया जाएगा। ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दृष्टि को साकार करते हुए यह दुर्लभ ‘त्रिपक्षीय कमीशनिंग’ (Triple-platform induction) भारत की बढ़ती नौसैनिक क्षमता का प्रतीक है।
आत्मनिर्भरता का नया कीर्तिमान
इन तीनों युद्धपोतों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी स्वदेशी तकनीक है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इन जहाजों में 75% से अधिक उपकरण और तकनीक स्वदेशी है। इसके निर्माण में देश के 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जो ‘मेक इन इंडिया’ की सफलता की एक बड़ी गाथा है।
इन तीन जांबाजों की खासियतें:
INS दुनागिरी (Stealth Frigate): प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित यह पांचवां स्टेल्थ फ्रिगेट है। आधुनिक स्टेल्थ सुविधाओं से लैस यह जहाज दुश्मन की रडार की पकड़ में आने से बच सकता है। यह घातक ब्रह्मोस मिसाइलों और अत्याधुनिक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों (Surface-to-Air Missile systems) से सुसज्जित है।
INS संशोधक (Survey Vessel): यह एक लार्ज सर्वे वेसल है, जिसे विशेष रूप से हिंद महासागर और तटीय क्षेत्रों के हाइड्रोग्राफिक और ओशनोग्राफिक डेटा एकत्र करने के लिए बनाया गया है। इसमें लगे ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (AUV) जैसे उन्नत उपकरण रक्षा और नागरिक दोनों क्षेत्रों के मानचित्रण में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे।
INS अग्रय (Anti-Submarine Warfare): ‘अरनाला-क्लास’ का यह शैलो वॉटर क्राफ्ट मुख्य रूप से उथले पानी और तटीय सीमाओं की सुरक्षा के लिए है। इसका मुख्य कार्य समुद्र के भीतर छिपी पनडुब्बियों और अन्य खतरों का पता लगाकर उन्हें नेस्तनाबूद करना है।
रणनीतिक महत्व
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन जहाजों का एक साथ शामिल होना हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की निगरानी और आक्रामक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा। जहाँ एक ओर INS दुनागिरी युद्धक क्षमता को मजबूती देगा, वहीं INS संशोधक और INS अग्रय तटीय सुरक्षा और रणनीतिक खुफिया जानकारी जुटाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
आज का यह आयोजन न केवल भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत के रक्षा निर्माण की बढ़ती साख का भी प्रमाण है।








