प्रदेश रिपोर्टर सुमन खूंटे 9981543471 



बुद्ध पूर्णिमा पर आयोजित प्रथम बौद्ध धम्म परिषद का हुआ सफल समापन,समापन दिवस पर खरसिया से डॉ. भोजराम दीपक, तोरन कुमार लक्ष्मी, आकाश दीपक, जागेश्वर लक्ष्मी एवं राकेश नारायण बंजारे का विशेष रूप से आगमन हुआ।
कोसीर (सारंगढ़)। बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित “प्रथम बौद्ध धम्म परिषद 2026” एवं 15 दिवसीय श्रामणेर शिविर का सफलतापूर्वक समापन बौद्ध विहार कोसीर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सम्पन्न हुआ। यह आयोजन 26 अप्रैल से 10 मई 2026 तक आयोजित किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए बौद्ध भंते, समाजसेवी, अनुयायी एवं श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय सहभागिता रही।
कार्यक्रम के मुख्य मार्गदर्शक पूज्य भदंत आनंद महास्थाविर जी (राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय भिक्षु महासंघ दिल्ली एवं अखिल भारतीय बुद्धगया महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन समिति) रहे। वहीं विशिष्ट मार्गदर्शक के रूप में पूज्य भदंत डॉ. शीलरत्न बोधी महाथेरो जी (दी रॉयल बुद्धिस्ट मॉनेस्ट्री स्कूल बिरबिरा, सिरपुर) का सान्निध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता भदंत बुद्धघोष बोधी जी (प्रदेश अध्यक्ष, अखिल भारतीय भिक्षु महासंघ छत्तीसगढ़ एवं बौद्ध समाज संरक्षण संवर्धन संघ) द्वारा की गई।
समापन दिवस पर खरसिया से प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के संरक्षक एवं पूर्व अध्यक्ष डॉ. भोजराम दीपक, युवा प्रकोष्ठ के पूर्व अध्यक्ष तोरन कुमार लक्ष्मी, आकाश दीपक, जागेश्वर लक्ष्मी तथा प्रदेश प्रवक्ता (साहित्य प्रकोष्ठ) राकेश नारायण बंजारे विशेष रूप से उपस्थित हुए। प्रतिनिधिमंडल ने बौद्ध विहार कोसीर पहुंचकर भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया तथा आशीर्वाद प्राप्त किया।
धम्म परिषद में लगभग सात प्रांतों से पधारे बौद्ध भंते प्रतिनिधियों का सान्निध्य एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। शिविर में गिंडोला के अश्विनी भंते जी, श्र्रामणेर सुरेश नारंग जी, बसंत नारंग जी सहित बड़ी संख्या में भंते व श्रामणेरों की उपस्थिति रही। समर्पित भाव से सेवाभावी एवं अनुशासित शिविरार्थी क्षेत्र में शांति, सद्भाव और मानवता का संदेश प्रसारित कर रहे थे। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने निर्माणाधीन विद्यालय हेतु सहयोग राशि प्रदान कर शिक्षा एवं समाज जागरण के कार्यों में सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने अपने उद्बोधन में कहा कि भगवान गौतम बुद्ध का दर्शन मानवता, करुणा, समानता और विश्व शांति का सार्वभौमिक संदेश है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब समाज वैमनस्य, हिंसा, भेदभाव, कट्टरता और मानसिक अशांति जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, तब बुद्ध के विचार पूरी मानवता के लिए प्रकाशपुंज का कार्य कर सकते हैं। बुद्ध का धम्म व्यक्ति को आत्मशुद्धि, संयम, मैत्री और सहअस्तित्व का मार्ग दिखाता है, जो वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
वक्ताओं ने कहा कि भगवान बुद्ध का “बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय” का सिद्धांत समाज को प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक एकता को समाज उत्थान का मूल आधार बताते हुए युवाओं से बुद्ध के विचारों को आत्मसात करने तथा अंधविश्वास, भेदभाव और सामाजिक कुरीतियों से दूर रहकर मानव सेवा के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार के धम्म परिषद एवं श्रामणेर शिविर का आयोजन सामाजिक चेतना, नैतिक मूल्यों और मानवीय संस्कारों को सुदृढ़ करने वाले ऐतिहासिक प्रयास हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देने के साथ-साथ समाज में शांति, अनुशासन, नैतिकता और मानव कल्याण की भावना को मजबूत करते हैं।
आयोजन के सफल संचालन हेतु बौद्ध समाज संरक्षण संवर्धन संघ (छत्तीसगढ़) की भूमिका की सराहना की गई तथा इसे मानव कल्याण, सामाजिक जागृति और बौद्ध धम्म के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया गया।








