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स्कूलों में मंत्रोच्चार और धार्मिक प्रार्थनाओं के निर्देश पर विवाद,
पूर्व जनपद सदस्य ने S.D.M.मालखरौदा को राज्यपाल के नाम से सौंपा ज्ञापन।
मालखरौदा/सक्ती छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों में दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र, भोजन मंत्र, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र के संचालन हेतु जारी किए गए हालिया दिशा-निर्देशों के खिलाफ विरोध के स्वर उठने लगे हैं। इसी कड़ी में मालखरौदा की पूर्व जनपद सदस्य अरुणा महिलांगे ने महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर इस आदेश को वापस लेने की मांग की है।
लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप
राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में अरुणा महिलांगे ने तर्क दिया है कि विद्यालय एक लोकतांत्रिक संस्था है, जहाँ सभी धर्मों के छात्र-छात्राएं बिना किसी भेदभाव के शिक्षा प्राप्त करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देश एक विशेष धर्म से प्रेरित हैं, जो अन्य धर्मों के छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करते हैं।
आदेश को तुरंत प्रभाव से बंद करने की मांग
ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह की धार्मिक गतिविधियों का संचालन छात्रों की स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के प्रतिकूल है। पूर्व जनपद सदस्य ने इस निर्देश की कड़ी निंदा करते हुए मांग की है कि सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार और इस तरह की धार्मिक गतिविधियों को तुरंत प्रभाव से पूर्णतः बंद किया जाए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान सोनित मधुकर, कला कृष्णा बर्मन,अंजोर साय बर्मन टांकेश्वर जाटवर, एवं अन्य साथी उपस्थित रहे








