==चैनल प्रमुख हलधर रात्रे 7974343059==

छत्तीसगढ़ की सियासत 2028 का रण अभी से तैयार नेताओं की दौड़ और जनता को लुभाने की कवायद तेज

रायपुर छत्तीसगढ़ की राजनीति में 2028 के विधानसभा चुनावों की आहट अभी से सुनाई देने लगी है। हालांकि चुनाव में अभी समय है, लेकिन प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सत्ता पक्ष जहां अपनी योजनाओं के दम पर जमीन मजबूत करने में लगा है, वहीं विपक्षी खेमे में भी ‘मिशन 2028’ को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो गया है
1. सत्ता का ‘पावर प्ले’: जमीनी स्तर पर पकड़ बनाने की कोशिश
वर्तमान में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार अपनी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने के लिए माइक्रो-प्लानिंग कर रही है।
बूथ स्तर पर सक्रियता: भाजपा ने संभाग स्तर से ऊपर उठकर अब विधानसभा-वार समीक्षा शुरू कर दी है। हर सीट पर सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का फीडबैक लिया जा रहा है।
विकास बनाम जनहित: सरकार का पूरा जोर विकास कार्यों के लोकार्पण और लाभार्थियों तक सीधा संपर्क साधने पर है। युवाओं और आदिवासियों को लुभाने के लिए विशेष रणनीति बनाई जा रही है
2. विपक्ष में हलचल: दावेदारी मजबूत करने की जंग
विपक्ष में भी 2028 की तैयारी को लेकर आंतरिक मंथन तेज है।
नए चेहरों की तलाश: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल अब संगठन को पुनर्गठित करने और नए युवा चेहरों को आगे लाने की कवायद में हैं राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने वाले आदिवासी बहुल क्षेत्रों में पकड़ मजबूत करने के लिए विपक्षी दल विशेष टीमों का गठन कर रहे हैं
टिकट की दौड़: पर्दे के पीछे कई वरिष्ठ नेताओं और उभरते हुए कार्यकर्ताओं ने अपनी दावेदारी के लिए संकेत देने शुरू कर दिए हैं। ‘अपने क्षेत्र’ में जनसंपर्क और कार्यक्रमों का आयोजन इस दावेदारी का ही एक हिस्सा माना जा रहा है
3. जनता को लुभाने का ‘सियासी फार्मूला’
नेताओं के बीच इन दिनों एक ‘अघोषित प्रतिस्पर्धा’ दिख रही है।
सोशल मीडिया और जनसंपर्क: नेताजी अब सीधे जनता के बीच चौपाल लगा रहे हैं, तो वहीं सोशल मीडिया के जरिए अपनी उपलब्धियों का बखान कर रहे हैं।
वादा और इरादा: विकास कार्यों की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपने से लेकर स्थानीय समस्याओं के समाधान के दावे तक—सब कुछ 2028 के ‘वोट बैंक’ को साधने की दिशा में एक कदम है।
4. क्या है चुनावी समीकरण?
2023 के नतीजों के बाद से छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया ध्रुवीकरण देखा गया है। 90 सीटों वाली विधानसभा में हर सीट पर हार-जीत का अंतर बेहद करीबी रहा है, इसलिए कोई भी पार्टी इस बार जोखिम लेने के मूड में नहीं है। ‘मिशन 2028’ के लिए अभी से शुरू हुई यह तैयारी बताती है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की राजनीति और अधिक आक्रामक होने वाली है।







