सतनाम साधिका श्रीमती रीतमती बंजारे (औरदीहीन) सतलोक गमन म विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित

चैनल प्रमुख हलधर रात्रे 7974343059

 

सतनाम साधिका श्रीमती रीतमती बंजारे (औरदीहीन) सतलोक गमन म विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित

 

गुरु घासीदास बाबाजी के जीवन चरित, सतनाम दर्शन अउ मानवता के संदेश ल जन-जन तक पहुंचाय म गीतकार, संगीतकार, प्रवचनकार, नाटककार, लेखक, कवि अउ कलाकार मन के बहुत महत्वपूर्ण योगदान हे। जे कलाकार मन के गीत, भजन, प्रवचन या साहित्य ल ऑडियो, वीडियो, पुस्तक, समाचार पत्र या सोशल मीडिया के माध्यम मिल जाथे, ओमन के काम हर धुरिहा-धुरिहा तक पहुंच जाथे अउ समाज म विशेष पहचान बनथे। फेर जेमन ल ए सब साधन नइ मिल पाय तेमन के योगदान हर सीमित दायरा म रह जाथे। ए घलो उतकेच सच हे कि सैकड़ों-हजारों ऐसे सतनाम साधक हें, जेमन ल कभी मंच नइ मिलिस, न प्रचार-प्रसार के साधन मिलिस अउ न बड़े स्तर के पहचान। फेर तभो ले ओमन अपन पूरा जीवन गुरु घासीदास बाबाजी के संदेश, सतनाम संस्कृति अउ मानवता के अलख जगाय म समर्पित कर दिन। ऐसे साधक मन के सेवा के मूल्यांकन प्रसिद्धि ले नइ बल्कि समाज अउ संस्कृति बर ओमन के निस्वार्थ योगदान ले होथे।

छत्तीसगढ़ के गांव-गांव म आज घलो ऐसे अनेक साधक मिलहीं, जेमन कीर्तन मंडली, सतनाम सत्संग, चौका-आरती, गुरु बाबा जयंती, जैतखाम पूजा अउ छोटे-छोटे समाजिक आयोजन मन म अपन सीमित संसाधन, समय अउ मेहनत लगा के सतनाम के जोत ल जलाय रखे हें। ए साधक मन के योगदान हर अतुलनीय हे। समाज हर ऐसन निस्वार्थ सेवक मन के सदैव ऋणी रही।

ऐसने गुमनाम सतनाम साधक, जे मन गॉव-गॉव के छोटे-छोटे आयोजन मन म गीत गायन करके गुरू के महिमा ल जन जन तक पहुंचाय म जीवन समर्पित करें हें तेमन म ग्राम तेलीकोट, खरसिया, जिला रायगढ़ (छत्तीसगढ़) निवासी श्रीमती रीतमती बंजारे (औरदीहीन), पति श्री रेशम लाल बंजारे के नाम अत्यंत सम्मान के संग स्मरण किए जात हे।

श्रीमती रीतमती बंजारे अपन नश्वर कंचन काया ल त्याग करके आज 30 जुलाई 2026 के दिन अनंत म विलीन हो गीन। उनकर सतलोक गमन केवल एक परिवार के क्षति नइ होकर के पूरा गांव अउ सतनाम समाज बर एक अपूरणीय क्षति ए।

उनकर जीवन हर संघर्ष, श्रम, त्याग अउ सेवा के एक प्रेरणादायक मिसाल रहिस। अत्यंत गरीब परिस्थिति म जीवन के शुरुआत करके ओमन अपन जीवन साथी श्री रेशम लाल बंजारे के संग मेहनत-मजदूरी करिन। कठिन परिस्थिति के बावजूद दूनों झन मिलके अपन पांचों लइका मन के पालन-पोषण करिन, ओमन ल पढ़इन-लिखइन अउ संस्कारवान बनइन। आज ओइ अथक परिश्रम, त्याग अउ गुरु घासीदास बाबाजी के असीम कृपा के परिणाम ए कि उनकर एक बेटा (श्री हेमंत बंजारे) महाविद्यालय म प्राध्यापक (प्रोफेसर) के पद तक पहुंचिस। ए सफलता हर एक परिवार ले बढ़के संघर्ष, श्रम अउ संस्कार के जीत ए।

श्रीमती रीतमती बंजारे के जीवन हर हमन सब बर ए संदेश देथे कि एक नारी, जेकर म प्रतिभा हे ओहर केवल अपन परिवार तक सीमित नइ रहे बल्कि समाज बर घलो उचित मार्गदर्शन कर सकत हे। उनकर जब परिवार के जिम्मेदारी पूरा होइस, त ओमन अपन जीवन साथी के संग समाज सेवा अउ सतनाम संस्कृति के प्रचार-प्रसार म पूरा निष्ठा ले जुट गीन। बिना कोनो स्वार्थ, बिना कोनो प्रसिद्धि के इच्छा, ओमन सतनाम के सेवा ल अपन जीवन के साधना बना लिन।

सतनाम संस्कृति के प्रचार-प्रसार के दौरान ओमन अपन जीवन साथी के संग कई-कई बार गिरौदपुरी धाम, भंडारपुरी, तेलासीपुरी, चटवापुरी, खपरीपुरी, पचरी धाम सहित गुरु घासीदास बाबाजी, राजा गुरु बालकदास जी अउ गुरु अमरदास जी ले जुड़े अनेक पवित्र स्थल के दर्शन यात्रा करिन। गांव-गांव म सत्संग, भजन-कीर्तन अउ धार्मिक आयोजन मन म सहभागी बनके सतनाम के संदेश ल जन-जन तक पहुंचाय के सतत प्रयास करिन।

आज जइसे-जइसे ऐसे समर्पित साधक मन हमन ले बिछड़त जात हें तइसे समाज के एक अमूल्य धरोहर घलो हमन ले दूर होत जात हे। प्रसिद्धि के रोशनी ले दूर रह के सेवा करोइया ऐसन लोग मन ह समाज के वास्तविक अधार स्तंभ एँ। ओमन के जीवन हमन ल सिखाथे कि सच्चा सेवा के उद्देश्य सम्मान पाना नइ होकर के समाज अउ मानवता के हित म अपन कर्तव्य निभाना ए।

श्रीमती रीतमती बंजारे के सतलोक गमन ले ग्राम तेलीकोट (तहसील खरसिया, जिला रायगढ़, छत्तीसगढ़) अउ आसपास के क्षेत्र म एक गहरा खालीपन आ गे हे जेकर भरपाई संभव नइ लागत हे। फेर उनकर संघर्ष, सेवा, सरलता, श्रद्धा अउ सतनाम के प्रति समर्पण हर अवइय्या पीढ़ी बर सदैव प्रेरणा के स्रोत बने रही।

प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज अउ समस्त समाज के तरफ ले मैं श्रद्धेय श्रीमती रीतमती बंजारे (औरदीहीन दादी मॉं) ल विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करत हंव। गुरू घासीदास बाबाजी ले प्रार्थना हे कि दिवंगत पुण्यात्मा ल अपन श्रीचरण म स्थान दें अउ शोक संतप्त परिवार ल ए असहनीय दुःख ल सहन करे के शक्ति प्रदान करे।

अपन पूरा जीवन सतनाम के सेवा म समर्पित करोइय्या श्रीमती रीतमति दादी ल अंतिम विदाई, सादर नमन अउ विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित।

 

— राकेश नारायण बंजारे

प्रदेश प्रवक्ता (साहित्य प्रकोष्ठ)

प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज

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