भव्य सिंदूर खेला और ढाक की थाप के साथ माँ दुर्गा को दी गई भावभीनी विदाई

==चैनल प्रमुख हलधर रात्रे 7974343059==

भव्य सिंदूर खेला और ढाक की थाप के साथ माँ दुर्गा को दी गई भावभीनी विदाई

सक्ति

श्री श्री दुर्गा पूजा एवं काली पूजा उत्सव समिति (रेलवे स्टेशन) तथा बंगबंधु बांग्ला समाज समिति, शक्ति के संयुक्त तत्वावधान में 21 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया।

मायके से ससुराल लौटीं माँ दुर्गा, महिलाओं ने दी विदाई

बंगाली संस्कृति में माँ दुर्गा को पुत्री के रूप में माना जाता है। मान्यता के अनुसार, विजयादशमी के दिन माँ अपने मायके से विदा होकर वापस लौटती हैं। इस अवसर पर समाज की महिलाओं ने पारंपरिक बंगाली रीति-रिवाजों का पालन करते हुए माँ दुर्गा के मस्तक, मुख और चरणों में सिंदूर लगाया तथा मिष्ठान खिलाकर उन्हें भावुक मन से अंतिम विदाई दी। कई महिलाएँ माँ की विदाई के इन पलों में भावविभोर होकर रो पड़ीं और अगले वर्ष उनके पुनः आगमन की मंगल कामना की।

सिंदूर खेला और पारंपरिक नृत्य का उल्लास

माँ दुर्गा की विदाई के उपरांत पारंपरिक ‘सिंदूर खेला’ का भव्य आयोजन हुआ। इसमें बंगाली समाज के साथ-साथ अन्य महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर शुभकामनाएं दीं। ढाक (पारंपरिक ढोल) की गूंज और ताल पर महिलाओं ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर विसर्जन कार्यक्रम को अत्यंत गरिमामय बना दिया। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व बंगाली महिलाओं द्वारा संस्कृति का अभिन्न हिस्सा माने जाने वाले आकर्षक ‘धुपु नृत्य’ (धुनुची डांस) की भी मनमोहक प्रस्तुति दी गई थी।

पारस्परिक सौहार्द और ‘शुभो विजया’ की गूँज

कार्यक्रम के अंत में सभी लोगों ने एक-दूसरे को ‘शुभो विजया’ कहकर बधाई दी, मुँह मीठा कराया और गालों पर सिंदूर लगाकर प्रेम व भाईचारे का संदेश प्रसारित किया। इस अनूठे आयोजन के माध्यम से बंगाली समुदाय ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखते हुए अद्भुत सामाजिक एकता का परिचय दिया।

गरिमामय उपस्थिति

इस भव्य आयोजन में बंगाली व अन्य सहयोगी समाज के गणमान्य लोग और मार्गदर्शक उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से—

श्री विनय सिन्हा, श्री रंजन सिन्हा, श्रीमती अरुणा भट्टाचार्य, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी बी.एल. खरे

जया भट्टाचार्य, अदिति देवाशीष बनर्जी, मल्लिका साक्षी गोपाल कविराज, मोनालिसा गौतम भौमिक, सोपोन भौमिक

धनलक्ष्मी अमन भौमिक, अमित भौमिक, मंजू संजय नाथ, पल्लव, कांचू भट्टाचार्य

अभिषेक सिन्हा अभिज्ञान, रिया संजय विश्वास, प्रीतम मुखर्जी, मनोज सरकार, अजीत दास, टोटना

इनके अलावा भारी संख्या में श्रद्धालु एवं मोहल्ले के गणमान्य नागरिक भी इस ऐतिहासिक उत्सव के साक्षी बने।

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