नियमों की अनदेखी कर लोग कलेक्टर से अनुमति लेने के बजाय अन्य तरीकों से करते हैं आदिवासी जमीन की खरीदी बिक्री जो बनता है विवाद का विषय

==चैनल प्रमुख हलधर रात्रे 7974343059==

नियमों की अनदेखी कर लोग कलेक्टर से अनुमति लेने के बजाय अन्य तरीकों से करते हैं आदिवासी जमीन की खरीदी बिक्री जो बनता है विवाद का विषय

जिला- सक्ती में इन दिनों एक गरीब आदिवासी के जमीन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जिसका वास्तविक कारण लोंगों द्वारा आदिवासी जमीन की खरीदी बिक्री के लिए नियमतः जिला कलेक्टर से अनुमति लेने के बजाय अन्य तरीकों से आदिवासी जमीनों का खरीदी बिक्री किया जाना है। सभी को इस बात की जानकारी है कि आदिवासी जमीन की खरीदी बिक्री के लिए विधिवत् कलेक्टर कोर्ट से अनुमति लिया जाना आवश्यक है। कलेक्टर कोर्ट में आदिवासी जमीन की बिक्री के लिए अनुमति मिलना इतना आसान नहीं होता, क्योंकि कलेक्टर कोर्ट में नियमों, कानूनों का बारीकी से ध्यान रखते हुए सही निर्णय लिए जाते हैं। जिस कारण लोग सीधे कलेक्टर कोर्ट में आवेदन लगाने के बजाय निचले राजस्व न्यायालयों से साठ-गांठ कर अपना काम कराने का प्रयास करते हैं।

ऐसा ही मामला इस समय सक्ती जिले में गरमाया हुआ है, जिसमें संबंधित व्यक्ति द्वारा न तो कलेक्टर कोर्ट में आवेदन लगाया गया है और न ही जिला कलेक्टर द्वारा इस विषय पर किसी भी प्रकार का निर्णय लिया गया है। जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि संबंधित आदिवासी द्वारा SDM कोर्ट सक्ती में अपनी जमीन की विक्रय के लिए केश दायर किया गया था। जिसमें उनके द्वारा अपनी जाति सबरिया बताई गई थी। जिस वजह से SDM कोर्ट द्वारा नामांतरण की कार्यवाही की गई। कुछ समय पश्चात् संबंधित व्यक्ति का जाति सबरिया होने के बजाय गोंड होने की जानकारी प्राप्त होने पर सक्ती SDM श्री अरूण कुमार सोम द्वारा तत्काल नियमानुसार उक्त जमीन का नामांतरण निरस्त कर उक्त जमीन को मूल भूमिस्वामी के नाम किया गया। जिससे किसी भी गरीब आदिवासी का हक छीना न जा सके।

जिला प्रशासन द्वारा मानवीय दृष्टिकोण और आदिवासी का हक बचाने के उद्देश्य से उक्त जमीन को उसके मूल भूमिस्वामी के नाम वापस की गई, लेकिन यह बात कुछ लोगों को अपने निजी स्वार्थ के कारण रास नहीं आ रही और वे उक्त जमीन को शासकीय घोषित कराये जाने का दबाव जिले के गोड़वाना गणतंत्र पार्टी के माध्यम से बना रहे हैं। अब यहां पर प्रश्न यह उठता है कि क्या किसी गरीब आदिवासी को भूमिहीन कर देना उचित होगा, जिससे उसका पूरा जीवन ही संकट में आ जाये?

गरीब आदिवासी का हक छीनने और उसकी भूमि को शासकीय घोषित कराने की मांग को लेकर गोड़वाना गणतंत्र पार्टी के आड़ में भानू प्रताप चौहान अनुसूचित जाति के द्वारा कई दिनों से धरना प्रदर्शन कर दबाव बनाया जा रहा है। गोड़वाना गणतंत्र पार्टी द्वारा धरने की आड़ में गरीब आदिवासी का हक छीनने का प्रयास पार्टी की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े कर रही है, क्योंकि यदि गो.ग.पा. के दबाव में उक्त भूमि को शासकीय घोषित कर दिया जाता है तो संबंधित आदिवासी का वर्षों पुराना अधिकार छीन सकता है। और उसका जीवन संकट में पड़ सकता है? आदिवासी हितों की बात करने वाली पार्टी द्वारा उठाया गया यह कदम आदिवासी हित में है या किसी व्यक्त्ति विशेष के निजी हित में यह संशय बना हुआ है।

यह तो कलेक्टर साहब की सजगता एवं महानता कहा जाये कि SDM सक्ती को उनके त्रुटिपूर्ण आदेश के पुनर्विलोकन की अनुमति देकर गरीब आदिवासी परिवार को भूमिहीन होने से बचाया है।

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