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छत्तीसगढ़ में स्वच्छ भारत मिशन के कर्मचारियों का शोषण: 15 साल से नहीं बढ़ा मानदेय, 3 महीने से वेतन गायब
छत्तीसगढ़ में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) को धरातल पर सफल बनाने वाले विकासखंड और संकुल समन्वयक आज गंभीर आर्थिक तंगी और बदहाली की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। राज्य शासन की उदासीनता के कारण पिछले 15-16 वर्षों से इनके मानदेय में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं की गई है, जबकि इस दौरान देश और राज्य में महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है।
वर्तमान स्थिति यह है कि एक विकासखंड समन्वयक को मात्र 12,700 रुपये और संकुल समन्वयक को 10,160 रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है। इतने कम मानदेय में आज के समय में परिवार का भरण-पोषण करना और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च उठाना असंभव हो गया है।
एडमिन मद में फंड का संकट, 3 महीने से वेतन बंद
संकट तब और गहरा गया जब शासन ने 16वें वित्त आयोग से मानदेय देने का आदेश तो जारी कर दिया, लेकिन स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के एडमिन मद में पर्याप्त फंड न होने का हवाला देकर वेतन पर रोक लगा दी गई। पिछले 3 महीनों से वेतन पूरी तरह बंद है। इसके ऊपर बी.पी.डी.सी. (BPDC) प्लान में शामिल कर इसे लागू करने के नाम पर अधिकारियों द्वारा 2 से 3 महीने का समय और लगाए जाने की बात कही जा रही है। व्यावहारिक रूप से कर्मचारियों को लगभग 7 महीनों से मानदेय प्राप्त नहीं हुआ है, जिससे मैदानी अमले में भारी निराशा, आक्रोश और भुखमरी की स्थिति बन गई है।
अन्य विभागों की तुलना में भारी भेदभाव
छ.ग. राज्य स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) कर्मचारी कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष नीलमणी चंदेल ने इस व्यवस्था को खुला शोषण करार दिया है। संघ ने आरोप लगाया है कि समान योग्यता और कार्य प्रकृति वाले अन्य विभागों के कर्मचारियों को इससे कहीं अधिक मानदेय मिल रहा है:
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY): विकासखंड समन्वयक का मानदेय – 39,875 रुपये प्रतिमाह
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM): संकुल समन्वयक का मानदेय – 26,490 रुपये प्रतिमाह
स्वच्छ भारत मिशन (SBM): विकासखंड और संकुल समन्वयकों को इससे आधे से भी कम वेतन दिया जा रहा है।
कर्मसंघ की प्रमुख मांगें
मिशन संचालक, अपर मुख्य सचिव, मुख्य सचिव और वित्त सचिव को ज्ञापन सौंपकर संघ ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
स्वच्छ भारत मिशन के मैदानी अमले का मानदेय 16वें वित्त आयोग के तहत PMAY और NRLM के समकक्ष किया जाए।
पिछले 7 महीनों से लंबित मानदेय का भुगतान तत्काल किया जाए।
कर्मचारियों को बीपीडीसी प्लान में शामिल करने की प्रशासनिक प्रक्रिया को तुरंत तेज किया जाए।
संघ के पदाधिकारियों—रजनीकांत बंजारे, अशोक साहू, यामिनी शर्मा, राजेन्द्र कुमार नवनीत, लल्ला वर्मा, नरेश साहू, करन सिंह कंवर और घनश्याम पटेल ने चेतावनी दी है कि यदि शासन द्वारा जल्द ही इस संबंध में सकारात्मक आदेश जारी नहीं किया गया, तो प्रदेश भर के समन्वयक सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।







