रिपोर्टर सुमन खूंटे 9981543471




VSK ऐप की तकनीकी कमियों के बीच ऑनलाइन अटेंडेंस से वेतन काटने के आदेश का छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने किया तीव्र विरोध
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा ऑनलाइन अटेंडेंस के आधार पर शिक्षकों एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों का वेतन आहरित करने संबंधी जारी आदेश क्रमांक/स्था.1/राज/वे.भु./2026/220 रायपुर दिनांक 27/07/2026 का कड़ा विरोध जताया है। संघ का कहना है कि विभाग द्वारा VSK (विद्या समीक्षा केंद्र) ऐप की जमीनी हकीकत और उसकी गंभीर तकनीकी खामियों को नजरअंदाज कर यह अव्यावहारिक आदेश थोपा गया है।
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष संजय ठाकुर, कार्यकारी प्रांताध्यक्ष उमेश भारती गोस्वामी, महामंत्री मनोज राय, भुवनेश्वर देवांगन प्रांतीय मंत्री, राजेन्द्र जायसवाल संगठन मंत्री, डॉ रविन्द्र द्विवेदी जिलाध्यक्ष, लक्ष्मीनारायण तिवारी प्रधान सचिव ने ऐप की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य के दूरदराज और ग्रामीण अंचलों में नेटवर्क की भारी समस्या बनी रहती है। शाला परिसर में उपस्थित होने के बावजूद ऐप में “शाला से दूरी” (Location Error) दिखाई जाती है। इतना ही नहीं, कई बार ‘Check-in’ की प्रविष्टि करने के बाद भी डेटा दर्ज नहीं होता और शाम को ‘Check-out’ करते समय ऐप पुनः ‘Check-in’ दर्ज करने को कहता है।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि ऐप में व्याप्त इन गंभीर तकनीकी त्रुटियों के कारण 100% शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज होना व्यावहारिक रूप से संभव ही नहीं है। ऐसे में ऐप की विफलता का खामियाजा शिक्षकों को अपने वेतन में कटौती के रूप में भुगतना पड़ेगा, जो कि पूर्णतः अन्यायपूर्ण है।
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया है कि संघ पूर्व में भी बायोमीट्रिक मशीन के माध्यम से प्रामाणिक उपस्थिति दर्ज कराने की मांग करता रहा है। संघ ने मांग की है कि:
ऑनलाइन VSK ऐप के स्थान पर विद्यालयों में बायोमीट्रिक मशीन से उपस्थिति व्यवस्था लागू की जाए।
जब तक बायोमीट्रिक प्रणाली सुचारू रूप से स्थापित नहीं हो जाती, तब तक पूर्ववत शाला की पारंपरिक ‘शिक्षक उपस्थिति पंजी’ के आधार पर ही पूर्ण वेतन का आहरण सुनिश्चित किया जाए।
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि VSK ऐप के आधार पर वेतन रोकने का यह तुगलकी फरमान तत्काल वापस नहीं लिया गया और शिक्षकों की जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं हुआ, तो प्रदेशभर के शिक्षक आंदोलन हेतु बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन एवं शिक्षा विभाग की होगी।






